Sunday, April 18, 2010

भोजपुरी के अश्लील गीतों पर प्रहार करे मीडियाः मालिनी अवस्थी



भोजपुरी की मशहूर गायिका मालिनी अवस्थी का कहना है कि मीडिया यदि अश्लील भोजपुरी गानों को हतोत्साहित और अच्छे गानों को प्रोत्साहित करे तो बेहतर प्रतिभाओं को देश-विदेशों में नाम रोशन करने का मौका मिलेगा। भोजपुरी के प्रमुख गायकों का कहना है कि इस भाषा के कुछ गीतों में अश्लीलता का स्तर अब इस हद तक बढ़ गया है कि इससे गीतों का माधुर्य और भाषा का लालित्य एकदम खत्म हो चला है। भोजपुरी की विख्यात गायिका मालिनी अवस्थी ने भाषा के साथ बातचीत में कहा कि किसी भी भाषा के लोकगीतों की तरह भोजपुरी गीतों में भी लोकजीवन का प्रचुर माधुर्य है। लेकिन व्यावसायिक तत्वों के हावी होने के कारण ऐसे गीतों को अधिक महत्व दिया जाने लगा है, जिनमें अश्लीलता भरी है। भोजपुरी लोकगीतों को मूलत: चार श्रेणियों संस्कार गीत, रितुपरक गीत, श्रम आधारित सामूहिक गीत और जातीय गीत में वर्गीकृत किया जा सकता है। इनमें कुछ जातीय गीतों को छोड़कर बाकी सभी में लोकजीवन की सोंधी गंध भरी हुई है। तात्कालिक लाभ के कारण कुछ तत्व जानबूझ कर ऐसे गीतों को पेश कर रहे हैं जिनमें अश्लीलता का बोलबाला है, लेकिन इससे यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए कि भोजपुरी भाषी सिर्फ ऐसे ही गीतों को पसंद करते हैं। भोजपुरी भाषी लोगों में अच्छा संगीत सुनने की बेहद ललक है। हाल में एक निजी टेलीविजन चैनल के संगीत प्रतियोगिता कार्यक्रम में वह निर्णायक की हैसितय से गयी थीं और वहां उन्होंने देखा कि कई नयी प्रतिभाएं भोजपुरी में उभरकर सामने आ रही हैं। यदि मीडिया में इन प्रतिभाओं को मौका मिले तो अश्लील गानों पर अपने आप रोक लगेगी।

7 comments:

आशुतोष दुबे said...

मालिनी सही कह रही है .
हिन्दीकुंज

M VERMA said...

भोजपुरी एक समर्थ सत्साहित्य रखता है. अश्लीलता का बहिष्कार होना ही चाहिये.

अनुनाद सिंह said...

मालिनी की बात पर ध्यान देना आज की परम आवश्यकता है। इसे सबका समर्थन मिले और इसे सभी लोग अपने-अपने स्तर पर व्यवहार में लायें, तभी भोजपुरी क्षेत्र साम्स्कृतिक विनाश से बच पायेगा। इसका असर दीर्घावधि में उस क्षेत्र के विकास, आत्मगौरव की भावना का विकास एवं अर्थपूर्ण रचनात्मकता पर पड़ेगा।

फ़िरदौस ख़ान said...

मालिनी जी, सही कह रही हैं...
मीडिया को भी अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए...

honesty project democracy said...

MALINI JI TO SAHI KAH HI RAHI HAIN LEKIN SITA KHAN JI UNSE ACHCHA TO HUM AAP KO KAHENGE KI AAPNE SAMAJ SE GANDGI KO SAF KARNE KE SAHSIK AAWAJ KA SATH DIYA AUR USE MAJBOOTI PRDAN KARNE KE LIYE APNE BLOG PAR POST KE RUP ME PRKASHIT KIYA. AAPNE BLOG KA SABSE ACHCHA AUR AAJ KI JAROORAT KE ANURUP PRYOG KIYA. ISKE LIYE HUM AAPKO DHNYWAD KA PATR MANTE HAIN .AAGE BHI AISE PRYAS KARTE RAHIYEGA.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

एक समय था जब दिल्ली के सप्रू हाउस में पंजाबी नाटकों का स्तर भी इतन ही गिर गया था...धीरे-धीरे वह नाट्यतंत्र स्वमृत्यु को प्राप्त हुआ...

Tarkeshwar Giri said...

malini ji thik kah rahi hain