Friday, March 12, 2010

लोकसभा में 15-16 मार्च की 'वो' मुहूरत!



(खबर sansadji.com सांसदजी डॉट कॉम से साभार)


महंगाई भी है, मौका भी और महिला आरक्षण बिल से अब जरा-जरा-सी मोहलत भी। आगे लोकसभा में आ रहा है वित्त विधेयक। इसके लिए 15-16 मार्च मोकर्रर-सा है। तीरंदाजी, वाक् युद्ध का अगला पड़ाव। महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष की बिखरी एकजुटता के सामने दोबारा एक-सुर होने की चुनौती। कांग्रेस की मंशा हो सकती है कि काश, बिखराव कायम रहे और बजट की रेल सकुशल सीटी बजाती हुई गंतव्य पर पहुंच जाए। कांग्रेस को मालूम है कि महिला आरक्षण बिल पर बिगड़े विपक्ष के सुरताल शायद पहले की तरह महंगाई-महंगाई पुकारते हुए भाजपा की गोलबंदी का सबब न बनें। किर्ची फंसी है तृणमूल कांग्रेस की। सो सुलझाने के जतन में जुटे ही हुए हैं पार्टी रणनीतिकार। तृणमूल ही क्यों, खतरे के खिलाड़ियों की कतार में द्रमुक भी तो है। इतना तो तय है कि भाजपा कांग्रेस की पटरी पर आने वाली नहीं, लेकिन कहते हैं, उसे आखिरकार आना ही पड़ेगा। उम्मीदन, वित्त विधेयक पर कटौती प्रस्ताव आना है। जब भाजपा उस दौरान अपने प्रस्ताव को पेश करेगी, तब देखने की बात होगी कि राजद-जदयू-सपा-बसपा-तृणमूल कांग्रेस-द्रमुक आदि क्या रुख अख्तियार करती हैं। जबकि संसद में विधेयक से कम अपनी-अपनी ढपली, अपने-अपने राग से ज्यादा मतलब रह गया है, फिर इस मुतल्लिक में आसार अच्छे कैसे सोचे जा सकते हैं। उधर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कल के अटकल-भरे इशारों पर गौर फरमाइए तो पता चलता है कि उनके राज्य में विधानसभा ही नहीं, लोकसभा चुनाव भी हो सकते हैं! अब इस अटकल का क्या कहा जाए, फिर भी कोई बड़ा राजनेता कुछ कहे तो बात-से-बात निकलती ही है। जाने कौन-सी घड़ी आए और नीतीश जी की वो मुराद भी पूरी हो जाए, लेकिन इतनी चरपरी अटकल में फिलहाल तो कोई दम दिखता नहीं। लगता है, वह पार्टी अध्यक्ष शरद यादव की आवाज पर अपनी आवाज भारी करने के लिए ऐसा-कुछ बोल गए। वित्त विधेयक पर भाजपा के साथ पूरे विपक्ष के लामबंद होने का सिर्फ एक ही तर्क जायज नजर आता है कि संसद से अपने-अपने पाले के देश को महंगाई विरोधी संदेश देने के लिए उन-सबकी दादा के वित्त-विधेयक के रू-ब-रू महंगाई-विरोधी-एकजुटता का तकाजा सिर पर आन पड़ा है। अब देखिए, 15-16 को लोकसभा में वित्त-विधेयक के मसले पर ऊंट किस करवट बैठता है! बहरहाल, कुछ-न-कुछ बमचक बर्दाश्त करने के लिए तैयार रहना ही होगा।

1 comment:

सतीश सक्सेना said...

बढ़िया विवेचन !