Sunday, March 14, 2010

मुलायम के बाद राज्यपाल का विमान बचा



(खबर sansadji.co सांसदजी डॉट कॉम से)

गृहनगर सैफई (इटावा) में हवाई पट्टी पर लैंड करते समय उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव बाल-बाल बच गए थे। उधर जयपुर के सांगानेर हवाई अड्डे पर सुरक्षाकर्मियों और विमानपत्तन प्राधिकरण की चूक के कारण हवाई अड्डे के टैक्सी-वे पर राज्यपाल प्रभाराव के विमान के सामने टैंकर आ गया लेकिन संयोगवश कोई हादसा नहीं हुआ। राज्यपाल का विमान जब हैंगर की ओर जा रहा था, उसी दौरान टैक्सी वे पर आ रहे टैकर को देख पायलट ने करीब तीन सौ फुट की दूरी पर विमान को रोक लिया। विमान उदयपुर से सांगानेर हवाई अड्डा पहुंचा था। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, समाजवादी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मैनपुरी (उ.प्र.) से पार्टी सांसद मुलायम सिंह यादव कल बाल-बाल बच गए। ये दिल थाम लेने वाला वाकया उस समय हुआ, जब श्री यादव का चार्टर्ड विमान इटावा की चारदीवारी विहीन हवाई पट्टी पर लैंड कर रहा था। इटावा श्री यादव का गृह जनपद है। शनिवार को जिस समय उनका चार्टर्ड विमान हवाई पट्टी पर लैंड करते हुए फर्राटे भर रहा था, ठीक उसी समय हवाई में एक साइकिल सवार घुस आया। उस समय हवाई पट्टी पर काफी संख्या में पार्टी के लोग तथा श्री यादव के सुरक्षा अधिकारी तथा अन्य कर्मी भी मौके पर मौजूद थे। इटावा में मुलायम का चार्टर्ड विमान उनके गृह उपनगर स्थानीय सैफई हवाई पट्टी पर लैंड कर रहा था तभी रनवे पर एक साइकिल सवार आ गया। मुलायम का प्लेन साइकिल के बगल से बगल से हवा की रफ्तार से आगे निकल गया। जिस समय मुलायम सिंह का विमान रनवे पर लैंड कर रहा था, उस समय रन-वे पर एक साइकिल सवार आराम से साइकिल चलाते हुए वहां से गुजर रहा था। अचानक पीछे से विमान जमीन पर उतरकर साइकिल के एकदम उपस्थित सपा कार्यकर्ता और हवाई पट्टी पर तैनात अधिकारी और कर्मचारी इस वाकए से स्तब्ध रह गए। सम्भवत: कम इस्तेमाल होने की वजह से स्थानीय निवासी बाउंड्रीवाल नहीं होने से इस हवाई पट्टी का शार्टकट के रूप में इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सवाल ये उठाए जा रहे है कि आखिर रनवे पर साइकिल सवार कैसे पहुंच गया। क्या उस समय रनवे क्लियर रखने की जिम्मेदारी किसी की नहीं थी? उल्लेखनीय है कि इसी तरह पिछले साल राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद राजनाथ सिंह भी बाल-बाल बच चुके हैं। पिछले दिसंबर में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील, उनके पति देवी सिंह शेखावत व राज्यपाल एमसी भंडारी उस समय बाल-बाल बच गए थे, जब उड़ीसा में पुरी से लौटकर भुवनेश्वर में उतरते समय उनके हैलिकॉप्टर की तीन पंखुडियां वहां एक शेड से टकरा गई। 16 यात्रियों की क्षमता वाले हैलिकॉप्टर का पंखा एक स्टोररूम के शेड से टकरा गया। हालांकि हैलिकॉप्टर सुरक्षित उतर गया था। हैलिकॉप्टर के पंखे के टकराने से एसबेस्टस की छत फट गई थी। पिछले साल अप्रैल में आसाम के स्वास्थ्य मंत्री हिम्मत बिस्व शर्मा और वन मंत्री रॉकीबुल हुसैन, असम युवक कांग्रेस के अध्यक्ष पिजस हजारिका के साथ पूर्वी असम के नागांव जिले में एक चुनावी सभा को संबोधित कर गुवाहाटी लौट रहे थे। उसी दौरान चार सीटों वाले हेलीकाप्टर में एक गड़बड़ी विकसित होने लगी। हेलीकाप्टर में तेज आवाज हो रही थी और सहयोगी पायलट ने उनसे कहा कि सीट बेल्ट बांध लें। हेलीकाप्टर नीचे आने लगा और हवाई अड्डे के परिसर में घास उगे इलाके में तेज धमाके के साथ उतर गया। हेलीकाप्टर में गड़बड़ी आने के बाद वैसी दुर्घटना तो मौत के मुंह से बच निकलने जैसी थी। ऐसा ही एक हादसा प्रणब मुखर्जी के साथ हुआ था। मुखर्जी उस समय बाल-बाल बच गए थे जब सिल्चर में एक चुनावी रैली को संबोधित करने जा रहे थे और उनका हेलीकाप्टर एक आकाशीय बवंडर में फंस गया। राजनाथ सिंह पिछले साल चुनाव के दिनों में उस वक्त एक सड़क दुर्घटना में बाल-बाल बच गए थे, जब उनकी कार एक ट्रैक्टर ट्रॉली से टकरा गई थी। एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए राजनाथ अपनी एम्बेसडर कार से मुरादनगर जा रहे थे तभी दुहाई इलाके में मेरठ रोड पर अचानक एक ट्रेक्टर ट्रॉली उनकी कार से आ टकराई। हादसे में राजनाथ सिंह को कोई चोट नहीं लगी, लेकिन उनकी कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री इसी तरह के हवाई हादसे में जान गंवा बैठे थे

1 comment:

आलोक मोहन said...

अच्छा था एक बेवकूफ़ कम हो जाता.देश का कुछ भला हो जाता